परम पूज्य आचार्य नन्दीश्वर जी महाराज का जन्म हिमालय क्षेत्र ( गंगोत्री धाम ) उत्तरकाशी में हुआ।
महाराज जी की बचपन से ही आध्यात्मिक रूचि देखकर इनके पिता श्री साकेतवासी रामेश्वर प्रसाद नौटियाल और माता श्रीमती
गोदावरी देवी ने आपको संस्कृत विद्यालय में प्रवेश करवाया।
आपने उत्तर माध्यमिक तक की शिक्षा अपने गृह जनपद
उत्तरकाशी से प्राप्त की है।
गुरुदेव जी ने शास्त्री की उपाधि श्री देवी संपत आध्यात्मिक महाविद्यालय परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम ऋषिकेश से
प्राप्त की तत्पश्चात भगवान विश्वनाथ की पावन नगरी काशी से गुरुदेव जी ने आचार्य की पदवी प्राप्त की है।
संस्कृत, संस्कृति और अपनी सभ्यता के प्रचार-प्रसार हेतु कुछ कालान्तर तक राष्ट्रीय स्वयं सेवक में अपनी सेवा दी ,
इसी बीच RSS के केंद्रीय कार्यालय केशव कुंज नई दिल्ली में रह कर संस्कृत भारती के माध्यम से संस्कृत भाषा का प्रचार
प्रसार किया।
सन २००२ भारत सरकार के शिक्षा विभाग ने संस्कृत विश्वविद्यालय में गुरुदेव जी की नियुक्ति शिक्षक के रूप में की
परन्तु गुरु जी ने धर्म प्रचार हेतु इस पद को अस्वीकार केर दिया था।
गुरुदेव जी ने आज तक श्रीमद भागवत कथा, श्रीमद देवी भागवत, श्री राम कथा, शिव महापुराण कथाओं के माध्यम से पूरे देश
दुनिया में धर्म प्रचार में लगे हुए हैं।