पंडित नन्दीश्वर जी का जीवन परिचय

रम्य गिरिवर कैलाश हिमालय गंगोत्री उतरकाशी क्षेत्र दिचली में श्रेष्ठ वंश ब्राह्मण नौटियाल कुल में विक्रमी सम्वत् 2032 श्रद्धास्वरुपिणी माँ श्रीमती गोदावरी देवी एवं साक्षात विश्वास स्वरूप पिता श्री रामेश्वर जी नौटियाल के घर सत्वगुण प्रधान “नन्दीश्वर जी” का जन्म हुआ | इनके माता पिता के शुद्ध संस्कारों का इनके जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ा और ये इन्हीं संस्कारों से आज लोक विख्यात सुप्रसिद्ध कथा वक्ता हैं | इनकी शिक्षा दीक्षा आठवीं कथा तक अपने गाँव की पाठशाला में ही हुई | इनकी रूचि आध्यात्म में अधिक होने पर माता पिता ने संस्कृत विद्यालय जोगथ में प्रवेश करवाया l यहाँ से इन्होनें उतर-मध्यमा (10+2) परीक्षा उतीर्ण की पुनः गंगा तट पर बसा ऋषिकेश स्वर्गाश्रम परमार्थ निकेतन दैवी सम्पद आध्यात्म संस्कृत महाविद्यालय से शास्त्री की परीक्षा पास की | भगवान शंकर से विशेष (लगाव) स्नेह होने के कारण ये केदार खण्ड, वद्रिकाश्रम, गुप्तकाशी विद्यापीठ से आचार्य, साहित्य, एम०ए०, संस्कृत की परीक्षा पूर्णाक प्राप्त करके उतीर्ण हुए | इनकी सम्पूर्ण शिक्षा डा० संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (वाराणसी) बनारस के अधिनस्थक हुई |

भारतीय संस्कृत एवं संस्कृति के प्रचार प्रसार हेतु संस्कृत भारती झण्डे वाला नई दिल्ली में इन्होनें एक वर्ष तक उत्कृष्ठ सेवा की | इन्होनें संस्कृत भारती के माध्यम से देश के हजारों महाविद्यालयों डिग्री कालेजों तथा धार्मिक संस्थानों में संस्कृत के शिविर चलाए | अपनी कार्य शैली की कुशलता से बड़े-बड़े विद्वानों का तथा सन्तों का आशीर्वाद इनको प्राप्त हैं |

ये दिल्ली विश्वविध्यालय से 1999 में साहित्य रत्न की उपाधि से विभूषित हुए | संस्कृत ज्योतिष में निष्णात होने पर भारत सरकार शिक्षा विभाग द्वारा संस्कृत भारती के माध्यम से 8 जून 2000 को दिल्ली विश्वविद्यालय में इनकी नियुक्ति हुई | लेकिन इन्होनें भगवान कार्य को प्राथमिकता देते हुए इस प्रोफैसर पद को छोड़ दिया | ये बचपन से ही बड़ी कुशाग्र बुधि के थे | इन्होंने बचपन में ही संकल्प ले लिया था कि मै जीवन भर राम कार्य ही करूंगा | इनके पूर्वजों को रामकथा पर विशेष महारथ हासिल हैं इसी कारण ये भी अपने पूर्वजों के संस्कारों से श्रीराम चरित मानस के मर्मज्ञ हैं | इनको हरिद्वार, ऋषिकेश उतरकाशी तथा वृन्दावन में श्रीमदभागवत कथा के दौरान अनेक सन्त, महात्माओं एवं कथा वक्ताओं के दर्शन का अवसर मिला |

श्रीरामचरित मानस (रामायण) एवं श्रीमदभागवत के माध्यम से ये पुरे भारत में एक नई क्रांति लाये है l इनके माता पिता धन्य-धन्य है l जिन्होंने इन जैसी महान विभूति को जन्म दिया है | ये अपनी ज्ञान रूपी किरणों से दुनियां को प्रकाशित कर रहें हैं और निरंतर करते रहेंगे |

“ आप युग-युग जिएं ”

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